प्यास बुझती ही कहां है

Date:

पल में उदासी तो खुशी भी पल में आ जाती है।

सोच बदलो तो दुनिया ही बदल जाती है।

 

हर जन्म दिवस पर घटता है एक साल मगर,

जिंदगी सही सलामत बीतने की खुशी तो हर साल जश्न में ही बदल जाती है।

 

यूं ही बीतते जाते हैं साल दर साल।

यूं ही बदलते रहते हैं ख्याल दर ख्याल।

शरीर जवान होता है और फिर एक दिन कमजोर भी हो जाता है।

 

बच्चों का बचपन भी जवानी में बदल जाता है।

अनुभवों की गठरी भी होती है भारी दिन पर दिन।

जिंदगी तो बीत जाती है लेकिन काम पूरे कहां निपट पाते हैं।

 

हर दुनिया से जाने वाले के साथ हम कहां जा पाते हैं?

आने वाले नए बच्चों के साथ मधु कहां जी पाते हैं?

 

सपने अक्सर अधूरे के अधूरे ही रह जाते हैं।

पुराने सपने पूरे हो भी गए हो तो नए सपने जग जाते हैं।

 

ईर्ष्या द्वेष लोभ मोह अहंकार यूं ही तड़पाते हैं।

जिंदगी बीतती रहती है लेकिन इच्छाएं खत्म होती ही कहां है?

 

चाहे कितना भी लंबा हो जीवन और कितनी भी पूरी हो आस लेकिन,

जीवन को जीने की प्यास बुझती ही कहां है?

 

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

लेटेस्ट खबरें

गांव-समाज की खबरें
Related

गांधीजी-लालबहादुर शास्त्री जयंती

2 अक्टूबर को दो जन्म जयंती मनाते, जन्मे भारत...

ये छप चुका है 

निराकार का रूप सजाना। बुद्धिमान तह मिले खजाना।। सृष्टि रची जिसने...

जीवन- मृत्यु दर्शन 

जीवन- मृत्यु दर्शन शीतल निर्मल जल, पोषक अन्नाहार बोल सुभाषित, होते महत्व...

गीत ताटंक छंद

गीत नहीं आते अधरों पर आंँखें जब दो रोती हैं। पेट...