हनुमान भक्त 

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हनुमान की भक्ति कब कहां काम आ जाए पता ही नहीं चलता,

भक्त के हृदय में से मुसीबत में खुद से हनुमान चालीसा निकल जाए कि उसको एहसास भी नहीं होता,

 

जब भी व्यक्ति चाहे किसी जंगल में अकेला फंस जाए ,

चाहे रात के समय किसी सड़क के पर फंस जाए चाहे

वह किसी मुसीबत में आ जाए एक हनुमान जी ऐसे हैं,

जिन्हें वह कोई भी बच्चा महिला व्यक्ति कोई भी उन्हें कभी भी याद कर ले

वह स्वयं आकर रक्षा करते हैं,

यह पवन पुत्र है ही ऐसे राम जी के ऐसे सेवक की राम भक्त खुद है उनके भक्त सब है,

कितनी बड़ी कृपा प्रभु ने पवन पुत्र ने पवन बनकर आसमान में कर डाली थी,

उड़ते हवाई जहाज में कैप्टन की हनुमान शक्ति बनकर रक्षा कर डाली थी,

यह भारत को सोने की चिड़िया, कहने वालों अब हीरे भी इसी भारत में है,

हीरो बनने के लिए किसी शिक्षा की किसी प्रशिक्षण की जरूरत नहीं पड़ती,

जब हनुमान शक्ति खुद व्यक्ति के अंदर होती है तो वह चाहे जमीन हो चाहे आसमां हो वह खुद से हीरो बन जाता है,

हनुमान शक्ति उसके अंदर जाकर निर्दोषों को बचा जाती है,

यह हनुमान की कृपा वह सनातन की यह रग रग में भारतवासी के समायी हुई वह धारा है,

 

यह तोड़ने वाले भारतवासी नहीं बचाने वाले भारतवासी के अंदर बहती है,

वाकई अब लगता है कि हमारे भारतवर्ष में सनातन फिर से अब बढ़ रहा है,

सनातन तो कभी गया था ना कभी गया है ना कहीं कभी जाएगा कुछ मानसिकताओं के कारण वह काम हो रहा था

पर अब सनातन ने फिर से धारा बह रही है,

फिर से सबके मन को लहर में लहराया रहीं हैं,

बस यही तमन्ना है सबकी सनातन घर-घर में छा जाए और सबके मन की अभिलाषाओं को भक्ति से जोड़ जाए।।

 

 

योगेश्वरी भारद्वाज

कोसीकला मथुरा उत्तर प्रदेश

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