व्रत तीज का करती आज
सभी सुहागन कर के साज
अमर रहे सबका श्रृंगार
जुड़ा रहे पति से यह तार
बनी रहे कुल की भी शान
गौरा मां दो यह वरदान
बालक खेले गोद हमारी
बिटिया भी हो प्यारी प्यारी
झोली में दो अमर सुहाग
दया तुम्हारी मिला सुभाग
चूड़ी बिंदिया कुमकुम लाते
पूजा आरत थाल सजाते
फल मेवा मिष्ठान चढ़ाते
व्रत निर्जल का नियम निभाते
मीठे मीठे भजन सुनाते
गौरा जी की महिमा गाते
भक्ति भाव से तुझे मनाते
छप्पन व्यंजन भोग लगाते
ऐसा वर दो गौरा मैया
सब पर रखना शीतल छैया
नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर
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