महोली, सीतापुर। नगर स्थित प्रज्ञानंम सत्संग आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महापुराण में श्रद्धालुओं ने भक्तिमय वातावरण में कथा का श्रवण किया। कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती महाराज ने श्रद्धालुओं को अहंकार से मुक्त होकर ईश्वर की भक्ति करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में अहंकार अनेक कठिनाइयों का कारण बनता है। यदि व्यक्ति अहंकार का त्याग कर सच्चे मन से भगवान का स्मरण और भजन करता है तो उसे प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान पर विश्वास बनाए रखना ही सच्ची भक्ति की पहचान है।
कथा के दौरान भक्त प्रहलाद के चरित्र का वर्णन करते हुए स्वामी अभयानंद सरस्वती ने कहा कि प्रहलाद ने कठिन परिस्थितियों में भी भगवान का स्मरण करना नहीं छोड़ा। उनका अटूट विश्वास भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सुख हो या दुख, प्रत्येक परिस्थिति में हरि नाम का सुमिरन करते रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भक्ति में अद्भुत शक्ति होती है। मन में ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास हो तो व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकता है। हरि नाम के स्मरण से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कथा प्रारंभ होने से पूर्व श्रद्धालुओं द्वारा कथा व्यास का तिलक-वंदन कर स्वागत किया गया। कथा के समापन पर विधिवत आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।






