कानपुर देहात माती अभिलेखागार रिकॉर्ड रूम की मनमानी के चलते कार्यप्रणाली के खिलाफ वकीलों का फूटा गुस्सा, उच्चस्तरीय जांच की मांग

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हिंदी दैनिक दी ग्राम टुडे समाचार ब्यूरो राजकुमार

 

अकबरपुर, कानपुर देहात

जनपद कानपुर देहात के माती स्थित अभिलेखागार रिकॉर्ड रूम की बदहाल व्यवस्था और कर्मचारियों की मनमानी के खिलाफ वकीलों ने मोर्चा खोल दिया है. अधिवक्ता समिति अकबरपुर कानपुर देहात के अध्यक्ष और महामंत्री ने एक शिकायती पत्र सौंपकर अभिलेखागार की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराने और इसमें सुधार करने की पुरजोर मांग की है.

अधिवक्ताओं का आरोप है कि अभिलेखागार की अव्यवस्था के कारण न सिर्फ उनका काम प्रभावित हो रहा है, बल्कि दूर-दराज से आने वाले वादकारियों मक्किलों को भी भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है शिकायती पत्र में उठाए गए मुख्य मुद्दे न्यायालयों को फाइलें भेजने में महीनों की देरी: पत्र में आरोप लगाया गया है कि फाइल नहीं मिल रही है का बहाना बनाकर महीनों तक पत्रावलियां अदालतों में नहीं भेजी जातीं, जिससे मुकदमों के निस्तारण में अनावश्यक देरी होती है और अदालतों का बहुमूल्य समय बर्बाद होता है अभिलेखों के मुआयना में बाधा वकीलों और पक्षकारों द्वारा नियमानुसार आवेदन करने के बावजूद समय पर मुआयना निरीक्षण के लिए दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते, जिससे केस की तैयारी और विधिक कार्यवाही प्रभावित होती है.

प्रमाणित प्रतियों Certified Copies के मिलने में लंबा इंतजार: अभिलेखों की सत्यापित प्रतियां मिलने में एक-एक महीने या उससे अधिक का समय लग जाता है, जिससे वादकारियों को उच्च न्यायालय हाई कोर्ट या अन्य सक्षम न्यायालयों में समय से अपील करने में कठिनाई होती है

दस्तावेजों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही अभिलेखागार में फाइलों का कोई वैज्ञानिक या व्यवस्थित रखरखाव नहीं है कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड क्षतिग्रस्त और अस्त-व्यस्त हालत में हैं, जिससे उनके पूरी तरह नष्ट होने या गायब होने का खतरा मंडरा रहा है कर्मचारियों का असहयोगात्मक रवैया संबंधित कर्मचारियों पर अधिवक्ताओं और जनता के साथ संतोषजनक व्यवहार न करने तथा उनके कार्यों को जानबूझकर लटकाए रखने का गंभीर आरोप लगाया गया है अधिवक्ता समिति ने की ये पांच प्रमुख मांगें समिति ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए निम्नलिखित सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की हैअभिलेखों को समय से उपलब्ध कराने के लिए एक स्पष्ट और बाध्यकारी समयसीमा निर्धारित की जाए अदालतों में पत्रावलियों को समयबद्ध तरीके से भेजना सुनिश्चित किया जाए.

प्रमाणित प्रतियों और मुआयना कार्य के लिए तय समय सीमा लागू की जाए.

अभिलेखागार के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाए.

अभिलेखागार की नियमित समीक्षा और प्रभावी निरीक्षण की व्यवस्था स्थापित की जाए.

अधिवक्ता समिति, अकबरपुर ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेगा और वकीलों व आम जनता के हित में जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाएगा.

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