बढ़ गई उसकी शरारत और कुछ।
डरती हूँ होगी फ़जीहत और कुछ।
इसलिए तो दूर उससे हो गई,
बढ़ न जाये उसकी हिम्मत और कुछ।
बेखुदी में जब खुदा भी साथ हो,
तब मिले उसकी इनायत और कुछ।
बात में जब बात बढ़ती ही गई,
सामने आई हकीकत और कुछ।
जब दरिंदों को नहीं मिलती सजा,
तब वो करते हैं हिमाकत और कुछ।
उसके जैसा बज़्म में कोई नहीं
ढा रही उसकी क़यामत और कुछ
जब भी *गीता* करता है कोई ख़ता
तब उसे देती हिदायत और कुछ।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश






