बधाई हो बधाई,राधा अष्टमी है आई -2
श्याम संग राधा आई, प्रेम कथा हर उर में बसाई
गोपिन की प्यारी सखी,ब्रज की हिरणी,
जिसने प्रेम-निष्ठा की ज्योति जलाई।
बधाई हो ———-
हर अंतर्मन में प्रेम-पुष्प सजाई,
अमृत-नीर की धार बहाई,
मनहरणी बाँसुरी मधुर सुनाई,
गोपिन लै के रास रचाई।
बधाई हो ———
कान्हा संग रास रचाए, प्रीति नदी में सबको डुबाई,
किशोरी जू किशोरी जू आई,
स्नेह-भक्ति-रस की नदिया बहाई।
बधाई हो ———-
कानन कुंज नगर ग्राम चहुँओर,
देखो खुशियाँ है बिखराई।
बधाई हो ———–
राधे राधे बोल,मन के ताले तोड़,
राधे राधे बोल हरि के द्वार खोल।- 2
बधाई हो बधाई ———- ।
सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन, ©®, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।






