सनातन हिंदू वर्ष में 12 महीनों का महत्व आनंद लेकर आये।
चैत महीना भारतीय नव वर्ष, विक्रम संवत की खुशियां लेकर आए ।
वैशाख माह फसलों को लहराए, पीली सरसों मुस्कुराए ।
जयेष्ठ महीना नौतपा की धूप बरसाए ।
आषाढ़ माह में बादल गरजे, वर्षा कराए।
सावन माह रिमझिम बरसा बीच भारत की आजादी पर्व और राखी पर्व मनवाए।
काबड़ यात्रा ,भोले की भक्ति में मन झूम -झूम जाए।
भादव माह हरियाली लाए और पर्व हरताली तीज मनवाए।
क्वांर -अश्विन माह नवरात्रि की भक्ति, दुर्गा देवी को मनाए।
कार्तिक माह शरद ऋतु ले ,दिवाली मनवाएं ।
अगहन- मार्गशीष माह खुशियों के फूल खिलाए ।
महीना विवाह शादी रचवाए, मंगल गीत गाए।
पूष माह हल्के दिन की बौछार लाए।
फागुन माह वर्ष का अंतिम माह, होली के रंग बरसाए ।
हर तीसरे वर्ष में पुरुषोत्तम माह अधिक मास आए ।
भक्ति सुमन खिलाएं ,भारतीय वर्ष के 12 महीना की महत्व कथा, भारतीय संस्कृति को सजाए।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित मौलिक है।






