भारत माता! तेरी माटी, माथे का सिंदूर लगे,
तेरे आँचल की छाया में, जीवन मेरा पूर्ण लगे।
हिमगिरि तेरे शीश सुशोभित, सागर चरण पखार रहा,
गंगा तेरी पावन गाथा, युगों-युगों से गा रहा।
तेरी गोद में वेदों की वाणी, बुद्ध की करुणा पलती है,
तेरी धरती पर वीर शिवा की, रणभेरी फिर बजती है।
राम-कृष्ण की पावन धरती, नानक की यह वाणी है,
झाँसी की रानी के साहस की, अमर निशानी है।
भारत माता! तू ही मेरी, श्रद्धा और अभिमान है,
तेरी खातिर जीना-मरना, मेरे जीवन का सम्मान है।
तेरी आन पर आँच न आए, यह संकल्प हमारा हो,
तेरी रक्षा में हर भारतवासी, सजग प्रहरी सारा हो।
तेरी माटी का कण-कण हम, प्रेम से शीश नवाएँगे,
देशहित में श्रम, सत्य, साहस—जीवन भर अपनाएँगे।
तेरे खेत हरे रहें माता, तेरी नदियाँ निर्मल हों,
तेरे बच्चों के हाथों में, ज्ञान और हुनर के संबल हों।
जाति-धर्म के भेद भुलाकर, तेरा मान बढ़ाएँ हम,
भारत माता! तेरे चरणों में, अपना सर्वस्व चढ़ाएँ हम।
जब तक साँस रहे तन में, तेरा ही गुणगान रहे,
भारत माता! जन्म-जन्म तक, तुझ पर मेरा प्राण रहे।
नीलचित्रा व्यास (चित्रलेखा व्यास)
कानोड़, उदयपुर (राजस्थान)






