भाद्र मास,शुक्लपक्ष की तिथि अष्टमी,हर्षोल्लास से मनाई जाती,
प्रभु श्रीनारायण की नारायणी रावल ग्राम में जन्म हैं पाती,
कीर्ति सुता, वृषभानु दुलारी, नाम राधिका,जानी जातीं,
सुंदर गोपकुमारी यहपग नूपुर कंठ में माला छवि पाती।।
नैनों में कंचन,अधरों पे लाली
आली सुंदर बृजभान लली,
दमके सखियन बीच यही, जैसे बागन कचनार कली,
कीर्ति किशोरी मुस्काएं जबै
बरसाने के छोरा गोपिन संग
नाचे रे राधा संग तंग गली।।
वृषभानु निहारत छवि राधा की,मन चकित देखि सुंदरता
याकी,
कृष्ण प्रिया वृषभानु दिया चमके जग में जग में जस दीप व बाती,
हर्षित जन बरसाने के,लखि स्वर्ग परी निज गांव में वे
सब नाचत,खेलत गावत संग में,दर्शन कर मुग्ध सबै बासी।
राधा भी कृष्ण, कृष्ण ही राधा
अनुपम आकृति सब हृदय बसाए
अष्ट सखिन में बन पटरानी राधा,निधिवन रास की जगह बनाए
राधा राधा सब रटत निरंतर
भेद कछू न राधा कृष्ण में
कृष्ण सखा उद्धव जब आए
देखा बरसाना राधा कृष्ण में
देव ऋषी जन जान न पाए
भेद दोऊ बिच कोउ न जाने
नारायण की लीला यह प्यारी
सारी श्रृष्टि दिखे अब राधा कृष्ण में।।
अवधेश कुमार श्रीवास्तव उन्नाव उत्तर प्रदेश






