कीर्ति कुमारी ने लिया आज यहां अवतार ।
जिनसे आल्हादित हुए सदा जगत आधार ।।1
मेरी श्री वृषभानु जा करता सदा प्रणाम ।
जिनको सदा निहारते मेरे प्यारे श्याम ।।2
अष्ट सखि जो आपकी करती सेवा नित्य।
चरण शरण के ध्यान से होता निर्मल चित्य।।3
बरसाने बरसाने आती आप सदा रस धार।
भक्तों का मेला लगा मिलता सब को प्यार।।4
मंदिर में संगीत संग गव रहे राग मल्हार ।
भक्त मंडली नाचती आनंद हुआ अपार ।।5
भादौ सुदी यह अष्टमी लिया आप अवतार।
प्रभु श्री मिलने आयेंगे करती है इंतज़ार ।।6
राधे बिन आधे रहें मेरे श्री घन श्याम।
नाम रूप लीला सहित मुझे चाहिए धाम ।।7
मक्खन प्रिय है आपको मैं सेवा में नित्य।
चरण शरण में राखियों मेरा अर्पित चित्त ।।8
परिपूर्ण जो प्रेम हो , स्वार्थ नहीं हो लेश ।
वह ही राधा तत्व है , सब अर्पण न शेष ।।9
वृंदावन विचरन करें श्यामा श्याम जू संग ।
ताकि छवि पर बार दें कोटिक काम अनंग ।।10
मोर कुटी नंदलाल जू बनकर आये मोर ।
राधा जू देखते रहीं, चित लीन्हो चितचोर ।।11
वृंदावन की स्वामिनी तुम हो प्रेम स्वरूप।
रीझत तुम पर श्याम जू सुन्दर तुम अनुरूप ।।12
जय राधे राजेश्वरी , जय हो कीर्ति कुमारि।
प्रभुप्राप्ति की कामना , रखियो लाज हमारि ।।13
चरनन की रज जो मिलें हो जाऊं मैं धन्य।
श्याम श्याम प्यारी बिना, नहीं चाहत कुछ अन्य ।।14
राधा मेरी स्वामिनी , स्वामी मेरे श्याम ।
युगल चरनन में मैं करों कोटि कोटि प्रणाम।।15
डा राजेश तिवारी ‘मक्खन’
झांसी उ प्र






