शीर्षक श्रिंगार

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खुले केस में तूं स्वप्न सुंदरी सी लगे,

तेरी मुस्कान मेरे दिल को छले !

 

ये बंद पलके भी मुझसे सवाल करे यारा,

कहे बोलिए कब,कहां मिलोगे क्या ख्याल है तुम्हारा।

 

चाहत बस इतनी कि तुझे पलकों में कैद रखूं,

पल-पल तेरी धड़कनों से बात में करूं।

 

मेरे मीत तुझे कोई और देखे तो जलता है जी,

अपने इश्क के आंचल से तुझे मैं बांध के रखूं ।

 

प्रिये तेरी इसी अदा पे तो मर- मिटे हे हम,

तेरे इश्की स्प्रे की महक दीदार को बेचैन करें।

 

ये दूरियां भी अब तो हमें पुड़ियों सी तले,

राते कांटो सी चुभे लुटे-लुटे से बैठे उसी पीपल के तले।

 

दुनिया से बेखबर हो लौट चले हम उसी डगर,

जहां मिली थी तेरी-मेरी पहली नज़र।

 

यादों की वही रात फिर सुहानी लगे,

सच कहूं खुले केश में तू स्वप्न सुंदरी सी लगे ।

🙏नाम शिवा सिंहल आबूरोड🙏

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