बहन जब भाई की कलाई पर,
बांधती है रेशम का धागा।
दोनों एक दूसरे से करते हैं,
दुख सुख बांटने का वादा।
बचपन की वो लड़ाई,
वो रूठना और फिर मनाना।
भाई बहन की वो शरारतें,
लड़ना और फिर मुस्कुराना।
बहन देती है भाई को दुआएं,
भाई देता बहन को विश्वास।
राखी के कच्चे धागे में बंध जाते हैं,
जीवन के सारे एहसास।
राखी सर्फ कलाई पर सजती नहीं,
इसमें यादें बसती है हमारी।
बहन की ममता और भाई का स्नेह,
दोनों की अटूट है यारी।
भाई बहन चाहे हो बहुत दूर,
राखी उन्हें पास ले आती है।
राखी के ये कच्चे पवित्र धागे,
उनकी दुनिया महकाती है।
राखी की हर गांठ कहती है,
भाई हमेशा मेरे साथ रहना।
हर धागा बन जाता है वादा,
बहन कहती मुझे आवाज देना।
राखी एक धागा है सबके लिए,
पर इसके अनगिनत एहसास होते हैं।
जो दिल से निभाई रिश्ते को,
वही हमारे लिए खास होते हैं।
सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।






