विविध

कुंडलिनी में मेरा परिचय और राष्ट्रपति

गंगा का तीरथ मिला , जन्मभूमि आध्यात्म।   जन्म लिया ऋषिकेश में , कुदरत का वह धाम ।   कुदरत का वह धाम, बड़ा ही सुंदर चंगा।   ' मंजु...

मन कचोटन–विवेचन

* यह मन बड़ा चंचल है कैसे इसे समझाऊ। मन की व्यथा हंस-हंस कर गाऊ या आंसुओं में गिनाऊ। जब मन की व्यथा बिगड़ती है...

कभी दिल से तुझको पुकारा था मैने

कभी दिल से तुझको पुकारा था मैने मुड़ा सा दिया वक्त धारा था मैंने।   तुम इज़हारे - उल्फत भी कर न सके, किया पहले ही पर इशारा था...

ऐसों जन भी होते हैं

ऐसे जन भी होते हैं जग में,किसी का वह सगा नहीं। इस जगत के मेले में भैया,सबको हरदम ठगा वही।।   गैरों की क्या?बात करें तब,अपने ही...

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी जन्म जयंती 

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 119 वीं जन्म जयंती पर नमन । सूर्य- भास्कर -से थे कवि दिनकर जी, प्रकाशित किया ओज से हिंदी साहित्य...

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