विविध

नैनां रा तीर

नैनां रा तीर चल्या, हियड़ो घणो घायल हो ग्यो, एक झलक में सांवरिया, मन म्हारो पागल हो ग्यो।   काजळ री धारां सूं, नैनां बातां करै, बिन बोल्या...

खिड़की पर ठहरी शाम

खिड़की पर ठहरी शाम, मुझे देखकर मुस्कुराती है। सूरज की आखिरी किरण, आसमान में मिल जाती है।   हवा ने छूकर मेरे मन को, कुछ अनकही बातें कही। पंछियों के लौटते...

जब पितर लौटते हैं

पितृपक्ष में घर का बंद संदूक जाने क्यों कुछ अधिक अपना लगता है।   कपड़ों के बीच दबी पुरानी गंध चुपके से उठती है और कमरा किसी भूले हुए स्पर्श से भर जाता...

कवि एक राजनीतिक समालोचक

भारत के आधुनिक भाग्य विधाता, हे राजनीति के नेता, अभिनेता जी, अब आपसे मैं आदित्य क्या कहूँ, आप सरल हृदय तो हैं ही नहीं, शब्दों के जादूगर ज़रूर...

बुराई से घृणा करें या घृणा को

बुराई से घृणा करें या घृणा कोरुपांतरित करें : एक नैतिक परामर्शीय विवेचन 1.)आचार्य रजनीश अपने प्रवचन में कहते हैं कि विज्ञान इसलिये विकसित होकर...

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