गूंज रही हर घर आंगन में,
गणपति की जयकार।
भाद्रपद की पावन बेला,
लेकर आई खुशियों की बहार।
रिद्धि सिद्धि संग खुशियां लाए,
मां पार्वती के दुलारे।
मंगल मूर्ति बनाकर...
हे माँ, गीर्वाणभारती की आत्मजा।
स्वीकारे हैं तुम्हें सारे भारत की प्रजा।
द्वाविंशति भाषाओं की हो तुम भगिनी।
भाषाई सौहार्दता की नित पुष्करणी।
स्वतंत्रता संग्राम में भी रही...
मिट्टी के खिलौने
रंग भरे सलोने
बचपन की आई याद,
पशु पक्षी, गुड्डे-गुड़ियां
मिट्टी से ही बनती थी सब्जियों की सलाद।
मिट्टी के खिलौनों से घर था आबाद।
कभी जो...
*।हिंदी दिवस 14 सितंबर के अवसर पर।*
*।।रचना शीर्षक।।*
*।।हिंदी भाषा जैसे कोई राजदुलारी है।।*
*।।विधा।।मुक्तक।।*
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हिंदी लगती बड़ी ही प्यारी है।
हिंदी सारे जग से न्यारी है।।
विश्व में...