ज़रा विचार कीजिये कि आज देश के सभी रेलवे स्टेशनों पर,
खारा पानी मिलता है व एक बोतल 20 रूपये में बिकता है,
करोड़ो रूपये की लागत से बने रेलवे स्टेशन पर क्या ?
रेलवे द्वारा कई जगह वाटर फ़िल्टर नहीं लगाये जा सकते?
इनका रखरखाव महंगा होतो पास में दान पात्र रख दो,
भारत वर्ष की जनता 1-2 रूपये डाल कर इतना पैसा तो,
दे ही देगी कि जितने से इनका नियमित रखरखाव हो सके,
इससे जनता को मज़बूरी में 20 रू. का पानी नही लेना पड़ेगा।
बल्कि प्लास्टिक बोतलों से, जो गंदगी फैलती है; और
पर्यावरण को होने वाले नुकसान से, देश को मुक्ति मिल जाएगी,
हाँ, ऐसा होने पर पानी बेचने वालो की जरुर छुट्टी हो जाएगी,
किसी सरकार ने अब तक ऐसा किया क्यों नहीं ?
इस पानी घोटाले को बंद करवाने के लिए किसी को फ़िक्र नहीं,
अगर आप हम साथ हैं तो इस मेसेज को शेयर कीजिये कि,
सरकार और माननीय रेल मंत्री व
प्रधान मंत्री तक तक पहुँचे,
और हम आप जिम्मेदार नागरिक होंने का फ़र्ज़ निभा सकें।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ






