जय दिव्य गंगे! जय माँ गंगे!
गूंजे तेरी जय-जयकार।
तेरी पावन धारा गाए,
भारत का सत्कार॥
शिव की जट में विराजी,
भागीरथ की आस।
तुम्हारे आने से महका है,
भारत का इतिहास।
दिव्य सी पैड़ियां दीप सजाएं,
सुंदर लगे संसार।
जय दिव्य गंगे! जय माँ गंगे!
गूंजे तेरी जय-जयकार।
लहरें तेरी वेद सुनावें,
ऋषियों का उपकार।
तेरे तट पर झुकता आया,
सारा ही संसार।
तेरा आंचल पाकर खिलता,
जीवन का आकार।
जय दिव्य गंगे! जय माँ गंगे!
गूंजे तेरी जय-जयकार।
आरती के दीप तैरते,
झिलमिल हर संध्या।
शंख-नाद से भर उठती,
पावन पुण्य दिशा।
भक्ति-भाव में डूब रहे हैं,
मन के हर उद्गार।
जय दिव्य गंगे! जय माँ गंगे!
गूंजे तेरी जय-जयकार।
निर्मल रहना, अविरल बहना,
हमारा यही विचार।
बिन तेरे सूना लगता है,
जीवन का संसार।
जन-जन मिलकर सदा करेंगे,
तेरा ही गुणगान।
जय दिव्य गंगे! जय माँ गंगे!
गूंजे तेरी जय-जयकार।
जब तक ये दुनिया रहेगी,
गूँजेगा तेरा नाम।
तेरे चरणों में अर्पित है,
मेरा यह प्रणाम।
दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जनपद संभल उत्तर प्रदेश






