
गर्मी की जब धूप सुनहरी,
धरती पर मुस्काए आम।
मीठी खुशबू बिखराता है,
सब फलों का राजा आम।
पीले-पीले गाल सुनहरे,
रस से भरा हुआ हर दाम।
देख इसे बच्चों के चेहरे,
खिल उठते हैं सुबह-शाम।
दशहरी हो या लंगड़ा प्यारा,
चौसा का भी अलग मुकाम।
हर बागों की शान बढ़ाता,
भारत की पहचान है आम।
रस, अचार और शेक बनाता,
हर मौसम में लेता नाम।
जिसने चखा स्वाद इसका,
भूल न पाया उसका स्वाद।
पेड़ों की डाली पर झूले,
जब पके सुनहरे आम।
कोयल भी गीत सुनाती,
महक उठे सारा धाम।
मीठा, रसीला और निराला,
सबके मन को करे गुलाम।
फलों की दुनिया का बादशाह,
सचमुच अद्भुत होता आम।
संजय कलमकार
फलों का राजा आम
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