*मेरा दिल सोच के इस बात को हर बार डर जाता*
*अगर मैं डगमगा जाती मेरा ईमान मर जाता*
डॉ. संजीदा खानम “शाहीन” का ग़ज़ल संग्रह बहते बहते दरिया बोला लोकार्पित
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29 सितम्बर, जोधपुर।
शायरा डॉ. संजीदा खानम “शाहीन” का प्रथम ग़ज़ल संग्रह “बहते बहते दरिया बोला” सोमवार को सावित्री मदन डागा साहित्य भवन में लोकार्पित हुआ।
समारोह की अध्यक्षता मशहूर शायर अनिल अनवर ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. शाहीन की गजलों पर बोलते हुए उन्हें नारी मन की कोमल भावनाओं की अभिव्यक्ति बताया। मुख्य अतिथि डॉ. क़ासिम रसूल फलाही ने “बहते बहते दरिया बोला” की ग़ज़लों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. शाहीन की संवेदनशील दृष्टि और रचनात्मक क्षमता की सराहना की। जबकि नामचीन शायरा रेनू वर्मा ने पत्र वाचन करते हुए ग़ज़ल संग्रह के विभिन्न पहलुओं को बारीकी से रेखांकित किया।
इस अवसर पर डॉ. संजीदा खानम “शाहीन” ने अपने ग़ज़ल संग्रह से *मेरा दिल सोच के इस बात को हर बार डर जाता, अगर मैं डगमगा जाती मेरा ईमान मर जाता*, तथा *किसने कितना क्या क्या घोला, बहते बहते दरिया बोला* आदि कलाम सुनकर खूब दाद पाई। इस मौके पर डॉ. शाहीन के उस्ताद शायर मनशाह”नायक” का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन उदीयमान कवयित्री अमिता भंडारी ने अपने अंदाज़ में किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कवयित्री रजनी अग्रवाल, एन डी निम्बावत, महेश पंवार, हंसराज हंसा, जनाब पीर मोहम्मद वाहिद मिनाई सुलेमानी चिश्ती, यूसुफ,अली महबूबुर्रहमान दिलीप पुरोहित, राखी पुरोहित, आनंद राज कल्ला, डॉ. छगन राज राव, डॉ. दीपा परिहार, आबिदा बेगम, साजीदा उर्फ सिमरन खानम, करिश्मा बानो
आरिफा खानम, सुश्री अदानोशी, मो. शादाब, मो. सूफियान, राजेंद्र शाह सिरोही, राजेश भैरवानी, रंगकर्मी प्रमोद वैष्णव, सुनील सोलंकी, कल्याण के. विश्नोई, चंचल चौधरी, सुनील ओझा, परवेज खान, नदीम खान, मो. रमजान, मो रहीस मो. आतिफ़, मो. साहिल आदि साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक शरीक हुए।
*सादर प्रकाशनार्थ*
प्रेषक
मनशाह “नायक”
मो. 8890162146
दिनांक – 29 सितम्बर, 2026






