हिन्दी का सम्मान 

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देश हमारा हिन्द है , देवें मात्रा भार ।

हिन्दी हि बन जायेगा, बढ़ जायेगा प्यार।।1

सकल जगत सम्वाद की , भाषा हिन्दी होय ।

विश्व गुरु भारत बनें, सहयोगो सब कोय ।।2

बिन्दी हिन्दी की लगे , भारत मां के बाद ।

सब प्रयत्न ऐसा करें , होये देश निहाल।।3

जो सोलह श्रृंगार हैं , बिन्दी का इस्थान।

वैसे हिन्दी को समझ , भाषा भाव महान ।।4

यही मातृ भाषा में , उत्तम कुल पहिचान ।

देववाणी बिटिया यही , करें जगत कल्यान।।5

विश्व व्याप्त भाषा बनें, अधिक बोलते लोग ।

शब्द सम्पदा अधिक है, अच्छा यह संयोग।।6

सबसे ज्यादा बोलते , इस भाषा को लोग ।

बुन्देली ब्रज संग में , बनता मोहन भोग ।।7

भाषाओं में मुख्य है, मधुरम दिव्य महान ।

जासु सुता हिन्दी मेरी , पूज्या मातु समान ।।8

मारीशस गुयाना फिजी , सूरीनाम त्रिनिदाद।

टोबैगो व नेपाल में , यह हिन्दी है आबाद ।।9

एक दिवस हिन्दी नहीं, प्रतिदिन कर प्रयोग ।

जन जन तक पहुंचें यही , मक्खन का सहयोग।।10

 

डा राजेश तिवारी मक्खन

झांसी उ प्र

,,,,,,,

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