ऐसा क्यों होता है अक्सर
जो हम सोचते हैं वो नहीं होता है
कुछ और होता है
रात को देखा ख्वाब
भोर होने पर टूट जाता है
और हकीकत सामने खड़ी होती है ।
ऐसा क्यों होता है अक्सर
जिंदगी एक पल में हॅंसाती है
तो दूजे ही पल रुलाती है
मुस्कुराहट के खजानों से भर देती है
तो गम की ऑंधियों से तोड़ देती है ।
ऐसा क्यों होता है अक्सर
जो सबसे करीब होते हैं
वही हमें अकेला छोड़कर चले जाते है
इस भीड़ भरे संसार में हम तन्हा हो जाते हैं
उनकी यादों के सहारे जिंदगी गुजारते हैं।
सुरभि
इंदौर






