
काला कोट नहीं, विश्वास की पहचान है,
सत्य की राह पर चलता उसका सम्मान है।
झूठ के अंधेरों से जो हर पल लड़ता है,
वही अधिवक्ता न्याय का दीपक बन जलता है।
कानून की किताबों में जीवन का सार लिखे,
हर बेबस की आँखों में उम्मीद का संसार लिखे।
न धन का अभिमान, न सत्ता का अहंकार,
उसकी वाणी में बस संविधान का सत्कार।
निर्दोष को सम्मान, पीड़ित को अधिकार मिले,
हर न्यायालय में सत्य का ही विस्तार मिले।
वकील नहीं, लोकतंत्र का मजबूत आधार है,
न्याय की रक्षा करना ही उसका सच्चा व्यवहार है।
कलम हो या दलील, दोनों का एक ही मंत्र,
“सत्य की विजय और न्याय का तंत्र।”
न्याय की राह में जो हर कठिनाई सहता है,
वही सच्चा अधिवक्ता कहलाता है।
अधिवक्ता – न्याय का प्रहरी
काला कोट नहीं, विश्वास की पहचान है,
सत्य की राह पर चलता उसका सम्मान है।
झूठ के अंधेरों से जो हर पल लड़ता है,
वही अधिवक्ता न्याय का दीपक बन जलता है।
कानून की किताबों में जीवन का सार लिखे,
हर बेबस की आँखों में उम्मीद का संसार लिखे।
न धन का अभिमान, न सत्ता का अहंकार,
उसकी वाणी में बस संविधान का सत्कार।
निर्दोष को सम्मान, पीड़ित को अधिकार मिले,
हर न्यायालय में सत्य का ही विस्तार मिले।
वकील नहीं, लोकतंत्र का मजबूत आधार है,
न्याय की रक्षा करना ही उसका सच्चा व्यवहार है।
कलम हो या दलील, दोनों का एक ही मंत्र,
“सत्य की विजय और न्याय का तंत्र।”
न्याय की राह में जो हर कठिनाई सहता है,
वही सच्चा अधिवक्ता कहलाता है।
अधिवक्ता संजय “कलमकार”
अधिवक्ता – न्याय का प्रहरी
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