नियम खेल का बदल रहे जो,खेल शुरू हो जाने पर।
आपत्ति क्यों उन्हें आजकल, पढ़ने और पढ़ाने पर।।
परिवर्तन के शाश्वत क्रम में,जो नियमों से चुने गए।
समय समय पर नवाचार के,नवप्रयोग से धुने गए।।
जिनसे पढ़कर जाने कितने,न्यायमूर्ति कप्तान बने।
डीएम सीएम और दरोगा, जागरूक इंसान बने।।
आश्चर्य है न्यायविदों पर,अकुशल उन्हें बताने पर।
नियम खेल का बदल रहे क्यों,खेल शुरू हो जाने पर।
प्रश्न समय का यही एक है,निर्णय की गलती सुधरे।
पर्यावरण रहे बासंतिक,नहीं किसी का घर उजरे।।
त्रुटिसुधार से आनाकानी, बुद्धिमता का काम नहीं।
शिक्षक को चोटिल करने से,सुधरेगा परिणाम नहीं।
अतः निवेदन एक सभी से,शिक्षक दिवस मनाने पर।
नियम खेल का कभी न बदलो,खेल शुरू हो जाने पर।।
डॉ.उदयराज मिश्र
मंडल अध्यक्ष,अयोध्यामंडल
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ,उत्तर प्रदेश
(माध्यमिक संवर्ग)
९४५३४३३९००






