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भ्रष्टाचार उजागर करने पर पत्रकार को मिली धमकी: सुल्तानपुर के भादा गांव में बंधक और सरकारी मंजूरी में बड़े घोटाले का आरोप।

सुल्तानपुर।
उत्तर प्रदेश में ‘जीरो टॉलरेंस’ के बीच सुल्तानपुर जिले में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को तोड़ने और सच की आवाज में हंगामा का एक मामला सामने आया है। विकास खंड दुबेपुर की ग्राम सभा भादा में कथित महाघोटेले को शामिल करने वाले स्थानीय पत्रकार सुनील तिवारी को ग्राम प्रधान द्वारा देख और गंभीर बताते हुए उन्हें धमकी दी गई है। पत्रकार ने इस संबंध में सोलोमन (डीएम) से मिलकर लिखित शिकायत दर्ज की है और अपनी सुरक्षा की भविष्यवाणी की है।
पूरा मामला क्या है?
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा में पिछले 5 वर्षों के दौरान ग्राम प्रधान राहुल तिवारी के पद पर विभिन्न विकास के अनुसार कार्यकलापों और सरकारी धन के बंदरबांट के आरोप लगे हैं। पत्रकार सुनील तिवारी ने ब्लॉक से लेकर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) तक इन साइंटियों के खिलाफ समय-समय पर प्रदर्शन किया था।
जब स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पत्रकार ने सीधे नामांकन से लेकर एक उच्च स्तरीय और सलाह जांच की मांग करते हुए लिखित शिकायत दर्ज की। आरोप है कि इसी सरकारी शिकायत में बौखलाकर ग्राम प्रधान द्वारा पत्रकार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं।
इन प्रावधानों में बड़े पैमाने पर बड़े पैमाने पर आरोप लगाए गए हैं,
शिकायत पत्र और स्थानीय भूखंडों के अनुसार, ग्राम सभा भादा में विकास के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। मुख्य रूप से कार्य में भारी वित्तीय निवेशकों की जोखिम भरी भूमिका निभाई गई है:
मनरेगा में ‘कागजी’ खेल: श्रमिक के अधीन चलाए गए नाली निर्माण, इंटरलॉकिंग रोड और तालाब सुंदरीकरण में केवल कागजी कोरम पूरा करने और फर्जी मास्टर रोल के माध्यम से पात्रों को लाभ दस्तावेजों का आरोप है।
बंदा शौचालय, फिर भी बढ़ रहा वेतन: सबसे हैरान करने वाला मामला सार्वजनिक शौचालय का है। आरोप है कि विलेज का एसाइकिल टॉयलेट लंबे समय से शेड में बंद है, लेकिन उसके केयरटेकर को हर महीने नियमित रूप से वेतन दिया जा रहा है। सवाल यह है कि जब जनता के लिए शौचालय खुला ही नहीं तो केयरटेकर को किस बात की तनख्वाह दी जा रही है?
स्ट्रीट लाइट एवं आवास योजना में धांधली: स्ट्रीट लाइट स्थापना एवं प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) में विद्युत पोलों पर गरीबों को आकर्षित कर पात्रों को रेवड़ियों की तरह लाभ की चमक का आरोप है।
जांच के दस्तावेज़ में अधिकारी भी:
इस पूरे प्रकरण में केवल ग्राम प्रधान ही नहीं, बल्कि ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ/बीडीओ), सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) और पंचायत मित्र की भूमिका पर भी गंभीर सवाल हो रहे हैं। मेन्स ने इन सभी के सिंडीकेट (गठजोड़) की साक्षियों की जांच की मांग की है।
पत्रकार सुरक्षा पर सवाल: स्थानीय मीडिया जगत में रोष
एक तरफा सरकार मजबूती पर कठोर रुख वाले मोटापे का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ हकीकत पर भरोसा करने वाले को अपनी जान और सुरक्षा का खतरा बना हुआ है। पत्रकार सुनील तिवारी को मिल रही धमकियों के बाद सुल्तानपुर के स्थानीय पत्रकार जगत में भारी रोष व्याप्त है। सरकार ने प्रशासन से मांग की है कि सच की आवाज उठाने वाले मित्र को तत्काल सुरक्षा कार्रवाई की जाए और निष्पक्ष पर सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
अब देखिएगा कि सुल्तानपुर जिला प्रशासन इस मामले को कितने पदों पर ले लेता है। क्या ग्राम सभा भादा के ग्रैनियल कार्य के अभिलेख, मास्टर रोल और भुगतान विवरण के स्तर पर भौतिक जांच (भौतिक सत्यापन) किया जाएगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या योगी सरकार के राज में सच की आवाज उठाने वाले पत्रकार को प्रशासन, न्याय और सुरक्षा दी जाएगी?

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