
दि ग्राम टुडे, कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षांत समारोह में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और निरंतर परिश्रम को दिया। पदक विजेताओं का कहना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित अध्ययन, अनुशासन, समय प्रबंधन, विषय की गहरी समझ और सकारात्मक सोच ही उत्कृष्ट उपलब्धियों की वास्तविक कुंजी हैं।

पदक विजेताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि परीक्षा के दिनों में केवल अंतिम समय की तैयारी के बजाय पूरे सत्र के दौरान निरंतर अध्ययन ने उन्हें सर्वोच्च स्थान दिलाया। अधिकांश विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने, स्वयं के नोट्स तैयार करने, शिक्षकों से नियमित मार्गदर्शन लेने और विषय को समझकर पढ़ने को अपनी सफलता का आधार बताया।
बी.एससी. कृषि की छात्रा प्रिया यादव, जिन्होंने एक साथ कुलाधिपति स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक सहित कई प्रतिष्ठित पदक अर्जित किए, ने कहा कि प्रथम सेमेस्टर से ही नियमित अध्ययन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें यह मुकाम दिलाया। उन्होंने विद्यार्थियों को शुरू से गंभीरता के साथ पढ़ाई करने की सलाह दी।
एम.एड. की छात्रा कीर्ति शुक्ला, जिन्हें एक साथ पांच पदक प्राप्त हुए, ने इसे अपने परिवार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि माता-पिता, शिक्षकों और मित्रों के सहयोग ने हर चुनौती को आसान बनाया। उनका लक्ष्य भविष्य में सहायक प्राध्यापक बनकर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना है।
एलएलबी की छात्रा जया परिहार ने कहा कि पढ़ाई, इंटर्नशिप, मूट कोर्ट और अन्य गतिविधियों के बीच संतुलन बनाना कठिन था, लेकिन समय प्रबंधन और निरंतर मेहनत से उन्होंने सफलता प्राप्त की। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल परीक्षा नहीं बल्कि विषय की गहराई से समझ विकसित करने की सलाह दी।
एम.ए. मनोविज्ञान की अरीबा आफताब ने अपनी उपलब्धि अपने पिता को समर्पित करते हुए कहा कि आंतरिक प्रेरणा ही सफलता की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने का लक्ष्य व्यक्त किया।
एम.एससी. भौतिकी की फरहीन रहमान ने कहा कि प्रोफेसरों, विभाग, साथियों और परिवार के सहयोग ने उन्हें विश्वविद्यालय में शीर्ष स्थान दिलाया। उन्होंने तनाव की स्थिति में शिक्षकों से मार्गदर्शन लेने की सलाह दी।
बी.ए. अर्थशास्त्र के देवांश पाण्डेय ने पढ़ाई के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के संतुलन को अपनी सफलता का आधार बताया। वहीं बी.ए. हिंदी की अदिति मिश्रा ने आत्मविश्वास और निरंतरता को सफलता का मूल मंत्र बताया।
एम.ए. राजनीति विज्ञान की अनन्या अवस्थी ने आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का सकारात्मक उपयोग कर पढ़ाई करने की बात कही। उन्होंने कहा कि विषय को समझकर पढ़ना और शिक्षकों से नियमित संवाद बनाए रखना आवश्यक है।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की स्वर्ण पदक विजेता प्रियंका कठेरिया ने विश्वविद्यालय में बिताए वर्षों को जीवन का सबसे यादगार समय बताते हुए कहा कि अनुशासन, सक्रिय सहभागिता और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उन्हें यह सम्मान दिलाया।
संगीत, संस्कृत, भूगोल, सांख्यिकी, वनस्पति विज्ञान, विधि, शिक्षा, मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, हिंदी, अर्थशास्त्र तथा अन्य विषयों के सभी पदक विजेताओं ने लगभग एक स्वर में कहा कि सफलता का आधार निरंतर अभ्यास, सकारात्मक सोच, अनुशासन और परिवार का सहयोग है। विद्यार्थियों ने अपने जूनियर्स को सलाह दी कि वे अंकों के पीछे भागने के बजाय ज्ञान अर्जित करने पर ध्यान दें, विषय को समझें, नियमित अध्ययन करें और हर परिस्थिति में आत्मविश्वास बनाए रखें।
41वें दीक्षांत समारोह के पदक विजेताओं की प्रेरक बातें यह संदेश देती हैं कि कठिन परिश्रम, ईमानदारी, समय का सदुपयोग और गुरुजनों का मार्गदर्शन किसी भी विद्यार्थी को सफलता की सर्वोच्च ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है। इन युवा प्रतिभाओं की उपलब्धियाँ न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।






