हाले दिल पूँछता नहीं कोई ।
जैसे अपना रहा नहीं कोई।।
अब तो अपने भी गैर बन बैठे,
हैं सब अपने सगा नहीं कोई।
काश अपने गले लगा लेता,
मुझको ऐसा मिला नहीं कोई।
हर खुशी प्यार से ही मिलती है,
दूसरा रास्ता नहीं कोई।
जब से तेरे करीब आई हूँ,
दिल में अपने बसा नहीं कोई।
किससे रखूँ वफ़ा की उम्मीदें।
अब यहांँ बावफ़ा नहीं कोई।
हम गरीबों की ओर है गीता,
प्यार से देखता नहीं कोई।
डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश






