शीर्षक वरदान

Date:

मैं बालक नादान मां शारदे ,

तेरे दर पे ले दुखी मन आया

मगर साथ में कुछ ना लाया,

जग का हूं ठुकरायाखो गई पहचान ,

मैं बालक,,,,,,,,,,,,,,,

खुद को हूं परेशान पाया,

जाने क्यों रूठ गई है काया ,

पापियों ने कैसा कहर ढाया ,

लगाओ मां इन दरिंदों को ठिकाने ,

मांगे एक अबला तुझसे ये वरदान ,

मैं बालक,,,,,,,,,

हाथ में ना कुछ माया है

मैं खुशी से जी सकूं ,

मां झोली में वो प्यार दे ,

पूजा अर्चना जानू ना ,

करूं कैसे तेरा गुणगान ,

मैं बालक,,,,,,,

धूप दीप बाती माई ,

सब दिल का बना लाई ,

भावों का में घी भर लाई ,

क्रोध अहंकार की ज्योत हे जलाई ,

लफ्जों के फूलों की माला है बनाई,

मां अपने भक्तों का रखती ध्यान ,

मैं बालक ,,,,,,,

मां निकल पड़ी बन काली,

करने दुष्टों का संहार खाली ।

देखो रास्ते में मिल गई भक्तों की टोली,

कोई बना भेंरूं,कोई लांगुर,

कोई सखा बना दरबान,

मां ये भक्तों की टोली है थोड़ी शैतान ।

मैं बालक नादान मां शारदे,

 

मां शारदे मन गुनगुनाने को मचले

तू वीणा के तार में सूर का झंकार दे,

मैं नाचूं मां तूं हो मेहरबान ,

मां बस रखलो मेरा इतना मान ,

मैं बालक नादान,,,,

✍️✍️ शिवा सिंहल आबू ✍️✍️

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