जय हिंदी भाषा जय देवनागरी लिपि

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जय हिंदी जय देवनागरी,जय राजभाषा बने राष्ट्रभाषा।

हम सब भारतीयों-देशवासियों,की हिंदी तू परिभाषा।।

 

राजनेताओं के दिल में अगर,ये चाह उत्पन्न हो जाएगी।

निश्चित हिंदी भाषा,राजभाषा से राष्ट्रभाषा हो जाएगी।।

 

हिंदी हमारी पहचान मान्यवर,हिंदी ही है हमारी एकता।

हिंदी ही हमारा गौरव भी है”हिंदी”अनेकता में एकता।।

 

अनुच्छेद 343 कहता है संघ,की राजभाषा हिंदी होगी।

इसके संग यह भी कहता,और’लिपि देवनागरी होगी’।।

 

अनुच्छेद344 राष्ट्रपति राजभाषा,पर सलाह देने वास्ते।

संसदीय आयोग और समिति,गठित करेगा इस वास्ते।।

 

अनुच्छेद 345 कहता कि,राज्यों की अपनी राजभाषा।

क्षे.भा. चयन अधिकार,राज्य विधानसभा से प्रत्याशा।।

 

अनुच्छेद 346 कहता एक राज्य से,दूजे राज्य के बीच।

या केंद्रीय पत्राचार की भाषा का,निर्धारण दोनों बीच।।

 

अनुच्छेद347 किसी राज्य के जनता के एक बड़े भाग।

के बोली-भाषा को मान्यता,देने राष्ट्रपति के सौभाग्य।।

 

अनुच्छेद 348 सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट-संसद विधेयकों।

अधिनियमों-भाषा(आंग्ल भाषा),प्रावधान करने को।।

 

अनुच्छेद 349 भाषा से जुड़े,कानूनों को बनाने वास्ते।

राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी का,आदेश देता है इस वास्ते।।

 

अनुच्छेद 350 जनता को,अपनी शिकायत निवारण।

में किसी भी भाषा में प्रार्थना पत्र,का अधिकार देता।।

 

350Aप्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा सुविधा।

देने का निर्देश राज्यों को देता,ताकि दे सके सुविधा।।

 

350B भाषाई अल्प संख्यकों,हेतु विशेष अधिकारी।

की नियुक्ति करता है,कार्य कर सके विशेषाधिकारी।।

 

और अनुच्छेद 351 कहे,हिंदी के प्रसार-विकास और।

इसके समृद्धि में संघ का,परम कर्तव्य तय करे और।।

 

ये बड़े सौभाग्य की बात है,जिसका शासन सत्ता दौर।

उसमें भी यदि न मिले हिंदी,राष्ट्रभाषा बनने को ठौर।।

 

तो ये दुर्भाग्य ही होगा,हिंदी मातृभाषा बने न सिरमौर।

इसको हक है बनने का,राष्ट्रभाषा हिंदी का चले दौर।।

 

साहित्य संगम संस्थान,राजभाषा पखवाड़ा 14 से 29।

विभिन्न कार्यक्रमों हेतु निर्धारित,माह सितंबर 2026।।

 

साहित्य संगम मुख्य मंच,संस्थापक श्री राज वीर सिंह।

सुंदर प्रयास कर रहे आप,आपकी संस्था श्रीमन सिंह।।

 

लक्ष्य में आप सफल हों,हिंदी राष्ट्रभाषा घोषित कराएँ।

हिंदी ज्योति से ज्योतिर्मय हो,विश्व की ये सभी धराएँ।।

 

दृढ़ इच्छा संकल्प शक्ति मजबूत कदम की जरूरत है।

हिंदी भाषा इतनी प्यारी सलोनी,मधुर अरु मोहक है।।

 

सर्वाधिकार सुरक्षित ©®

 

रचयिता :

*ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*

सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.

(शिक्षक कवि लेखक साहित्यकार समीक्षक समाजसेवी)

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