*वीरों, कमान संभालते चलो”*
हे वीरों! माँ भारती पुकारती,
कमान देश की संभालते चलो।
बचाने आन माँ भारती की,
कदम-कदम बढ़ाते चलो।
माँ भारती की शान में,
निशां जीत के बनाते चलो।
मुश्किलें कैसी भी आएँ,
हँसकर मिटाते चलो।
कदम कदम बढ़ाते चलो…
सीमा पर डटे जवानों का,
सम्मान बढ़ाते चलो।
कंधे से कंधा मिलाकर,
गौरव देश का बढ़ाते चलो।
कदम कदम बढ़ाते चलो…
हाथ से हाथ मिलाकर सभी,
मशाल जलाते चलो।
त्याग, तपस्या और संयम से,
भारत को आगे बढ़ाते चलो।
कदम कदम बढ़ाते चलो…
एक तिरंगा, एक है भारत,
इसका मान बढ़ाते चलो।
मिल-जुलकर प्रेम से सारे,
देश की शान बढ़ाते चलो।
कदम कदम बढ़ाते चलो…
आँधी आए चाहे आए तूफाँ,
हिम्मत अपनी बढ़ाते चलो।
माँ भारती की पावन धरती,
लाज इसकी बचाते चलो।
कदम कदम बढ़ाते चलो…
वीरता के नव दीप जलाकर,
अंधकार मिटाते चलो।
सत्य, अहिंसा, प्रेम के साथ,
भारत गौरव गाते चलो।
कदम कदम बढ़ाते चलो…
हे वीरों! मां भारती पुकारती,
कमान देश की संभालते चलो।
बचाने आन माँ भारती की,
कदम कदम बढ़ाते चलो।
जय-जयकार लगाते चलो!
कदम कदम बढ़ाते चलो!
स्वरचित मौलिक गीत
दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जनपद संभल उत्तर प्रदेश






