विविध

प्रकाशन हेतु- हिन्दी दिवस

भारत माता के वंदन में, गीत नया गाएँ हम सब! हिन्दी के पावन आँगन में, दीप जलाएँ हम सब!!   तुलसी-कबीर, सूर की वाणी, जिसमें अमृत रस घोले। मीरा के भजनों...

बेटी पढ़ेगी तो घर बढ़ेगा

बेटी को भी सपने देखने दो, उसके सपनों को सच होने दो। क्यों रोको उसके कदमों को, क्यों बाँधो उसकी उड़ानों को। उसके हाथों में कलम सजने दो, उसकी...

प्रकाशन हेतु रचना प्रेषित

निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के,मिटे न हिय को शूल, आज तलक मिल सका न,हिंदी को वह मान, सदियों से...

ग़ज़ल 

हाले दिल पूँछता नहीं कोई । जैसे अपना रहा नहीं कोई।।   अब तो अपने भी गैर बन बैठे, हैं सब अपने सगा नहीं कोई।   काश अपने गले लगा...

शीर्षक वरदान

मैं बालक नादान मां शारदे , तेरे दर पे ले दुखी मन आया मगर साथ में कुछ ना लाया, जग का हूं ठुकरायाखो गई पहचान , मैं बालक,,,,,,,,,,,,,,, खुद...

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